{जीव विज्ञान*} Download Biology Notes on Human Blood in Hindi- मानव रक्त से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य

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Download Biology Notes on Human Blood in Hindi यहां से पढ़े – दोस्तो आज हम Science GK in blood से संबन्धित कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे मे आप सभी छात्रो को विस्तार से बतायेगें। जैसा कि आजकल सभी एक दिवसीय परीक्षा में बाँयलोजी से अक्सर प्रश्न पूछे जाते है

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जो छात्र किसी भी एकदिवसीय परीक्षा की तैयारी कर रहे है उनके लिए भी यह Download Biology Notes on Human Blood काफी महत्वपूर्ण है आप इस लेख की पीडीएफ नीचे दिये गये डाउनलोड कर सकते है

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  • हीमेटोलॉजी — रक्त एवं संबंधित अध्ययन
  • मानव रक्त एक श्यान तरल (Viscos fluid) है। 
  • रक्त अर्द्धतरल (semi-liquid) अवस्था में रहता है। 
  • रक्त रूधिरवाहिनियों (blood vessels) में प्रवाहित होने वाला तरल संयोजी ऊतक (liquid connective tissue) है। 
  • रक्त में RBC तथा WBC की उपस्थिति ही इसकी श्यानता (Viscosity) का कारण है। 
  • रक्त के तरल भाग को प्लाज्मा कहते हैं जिसमें रुधिर कणिकायें तैरती रहती हैं। 
  • यह शरीर के प्रत्येक अंगों में बहता है तथा पदार्थों का परिवहन भी करता है अतः इसे ‘परिसंचारी ऊतक’ (Circulatory Tissue) भी कहते हैं। 
  • मानव शरीर में रक्त की मात्रा 5-6 लीटर तक होती है जो शरीर के आयतन का लगभग 1/13 वां भाग होता है।
  • मानव शरीर में रक्त परिसंचरण तंत्र की खोज विलियम हार्वें ने की थी। 
  • एंटनी वॉन ल्यूवेनहॉंक ने लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की तथा ग्रैब्रियल एँड्रल व विलियम एडीसन ने श्वेत कोशिकाओँ (WBC) की खोज की थी। 
  • कार्ल लैंडस्टीनर ने मनुष्यों में विभिन्न रक्त समूहों की खोज की थी।

Human Blood and its components (रक्त के अवयव)

1- लाल रक्त कणिकाएं (Red blood cells or Red Blood Corpuscles (RBCs), Erythrocytes)

  • इनकी संख्या एक मिमी. में लगभग 45 लाख होती है, इसमें अर्ध तरल जीव द्रव्य होता है। 
  • इसमें एक श्वसन वर्णक पाया जाता है जो एक लौह यौगिक होता है, इसे हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) कहते हैं। 
  • यह एक प्रोटीन होता है जो ऑक्सीजन को शोषित करने का कार्य करता है। 
  • लाल रक्त कोशिकाएं कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों तक पहुंचा कर उसे शरीर से निकालने का भी काम करती हैं। 
  • लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में होता है। 
  • इनका जीवनकल 120 दिनों का होता है, इसके बाद वे नष्ट हो जाती हैं। 
  • विटामिन ई, विटामिन बी 2, बी 12, और बी 3 इन कोशिकाओं के निर्माण में सहायक हैं।
  • स्तनधारियों की विकसित लाल रक्त कोशिकाओँ में माइटोकॉण्ड्रिया तथा केन्द्रक नहीं पाया जाता है।

2- श्वेत रक्त कणिकाएं {White blood cells (WBCs), Leukocytes or Leucocytes}

  • ल्यूकोसाइट्स या सफेद रक्त कोशिकायें, बीमारी और बीमारी के विरुद्ध अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। 
  • ये रंगहीन, आकारहीन अमीबा के आकार की तरह पिलपिली होती हैं। 
  • 500 RBCs के बीच में एक WBC होती है। 
  • श्वेत रक्त कोशिकाओं का अस्थि मज्जा (Bone marrow) के अंदर ही उत्पादन होता है, और ये रक्त और लसीका ऊतकों (Lymphatic Tissues) में जमा रहती हैं। 
  • श्वेत रक्त कोशिकाओं का जीवन छोटा है, इसलिए इनका उत्पादन लगातार होता रहता है। 
  • ये दो प्रकार की होती हैं-
    1. कणिकामय श्वेत रक्त कणिकाएं (Granulocytes) 
    2. कणिकारहित श्वेत रक्त कणिकाएं (Agranulocytes) 

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1. कणिकामय श्वेत रक्त कणिकाएं (Granulocytes) – ये तीन प्रकार की होती हैं-

  1. बेसोफिल्स (Basophils)- यह लगभग 5% होती हैं। ये संक्रमण के समय अलार्म का काम करती हैं। ये हिस्टामिन (Histamine) नाम के एक रसायन का स्रावण करती हैं, जो एलर्जी रोगों का सूचक होता है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  2. इओसिनोफिल्स (Eosinophil’s)- यह लगभग 3% होती हैं। ये परजीवियों को मारने, कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने और एलर्जी प्रतिक्रियाओं के खिलाफ सहायता प्रदान करती हैं।
  3. ट्रोफिल्स (Neutrophils)- यह लगभग 67% होती हैं। ये बैक्टीरिया और कवक आदि को मारकर पचाने का कम करती हैं। शरीर में इनकी संख्या सबसे ज्यादा होती है। संक्रमण हमलों की स्थिति में ये रक्षा की पहली पंक्ति में होती हैं।

2. कणिकारहित श्वेत रक्त कणिकाएं (Agranulocytes)-ये भी 3 प्रकार की होती हैं-

  1. लिम्फोसाइट ( Lymphocytes)- ये लगभग 25% होती हैं। वे बैक्टीरिया, वायरस और अन्य संभावित हानिकारक संक्रमणों के खिलाफ शरीर की रक्षा के लिए एंटीबॉडी पैदा करती हैं। 
  2. मोनोसाइट्स (Monocytes)- ये लगभग 1.5% तक होती हैं। ये मुख्यतः जीवाणुओं को नष्ट करती हैं।
  3. मेक्रोफेजेस (Macrophages)- लगभग 3% तक होती हैं।

लिम्फोमा क्या होता है ? 

  • लिम्फोमा एक प्रकार का कैंसर है जो प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) में मौजूद संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाओं में शुरू होता है जिन्हें लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes) कहा जाता है। 
  • ये कोशिकाएं ‘लिम्फ नोड्स’ (Lymph nodes), प्लीहा (Spleen), थाइमस (Thymus), अस्थि मज्जा (Bone marrow) और शरीर के अन्य भागों में मौजूद होती हैं। 
  • जब आप लिम्फोमा से ग्रस्त होते हैं, तो लिम्फोसाइट्स स्वरुप में बदल जाते हैं और नियंत्रण से बाहर बढ़ने लगते हैं।

3. रक्त विम्बाणु या प्लेटलेट्स (Platelets or Thrombocytes)-

  • प्लेटलेट्स आकार में प्लेट की तरह, छोटी रक्त कोशिकाए होती हैं, जो रक्तस्राव (Bleeding) को रोकने के लिए रक्त का थक्का ज़माने में मदद करती हैं साथ ही वे कुछ रसायनों का भी स्राव करती हैं,जो अन्य प्लेटलेट्स को रक्तस्राव की जगह पर पहुँचाने के लिए संकेत देते हैं। 
  • प्लेटलेट्स का निर्माण भी श्वेत और लाल रक्त कणिकाओं के साथ ही अस्थि मज्जा में होता है। 
  • इनका जीवन काल लगभग 10 दिनों का होता है। इनमे ‘केन्द्रक’ नहीं पाया जाता है। एक घन मिमी. में इनकी संख्या 25 लाख होती है।
  • यह केवल स्तनधारियों मं पाई जाती हैं तथा रक्त मे इनकी संख्या 2.5-4 लाख/mm होती है।

Lymph (लसीका)

  • लसिका (Lymph)- एक अन्त:स्रवित द्रव है जो मानव की कोशिलसीका कोशिकाएँ (Lymph cells) एक प्रकार की श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC) हैं, जिनका निर्माण लसीका ग्रंथियों, झिल्ली, थाइमस ग्रंथि तथा अस्थिमज्जा द्वारा किया जाता है। काओं के बीच में पाया जाता है। 
  • रुधिर कोशिकाओं से प्लाज्मा तथा श्वेत रुधिर कणिकाएँ छनकर ऊतकों में पहुँच जाती हैं। यह छना हुआ तरल लसिका कहलाता है। 
  • लसिका तंत्र द्वारा यह तरल वापस रुधिर में पहुँचाया जाता है।
  • लसिका अंगों व गाँठों में लिम्फोसाइट्स का परिपक्वन होता है।
  • लसिका अंगों व लसिका गाँठों में एण्टीबॉडीज का निर्माण होता है। ये प्रतिरक्षा तंत्र का मुख्य भाग बनाती हैं।

रक्त (Blood) और लसीका (Lymph) में अंतर:

  • रक्त लाल रंग का होता है जबकि लसीका रंगहीन या पीला होता है।
  • रक्त रुधिर वाहिनी अर्थात धमनी और शिरा में प्रवाहित होता है जबकि लसीका उत्तक के बीच खाली स्थान में प्रवाहित होता है।
  • रक्त का प्रवाह शरीर में द्विदिशीय होता है जबकि लसीका का प्रवाह केवल एक ही दिशा में अर्थात उतक से हृदय की ओर होता है ।
  • लसीका में फाइब्रिनोजेन की मात्रा कम पाई जाती है जबकि रुधिर में फाइब्रिनोजेन की मात्रा अधिक पाई जाती है.
  • लसीका थक्के कम बनाती है क्यूंकि उसमे फाइब्रिनोजेन की मात्रा कम होती है लेकिन रुधिर आसानी से थक्के बना लेती है क्यूंकि इसमें फाइब्रिनोजेन की मात्रा अधिक होती है.

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अन्य महत्वपूर्ण तथ्य-

  • नैफ्थोक्विनोन या फ्लोक्विनोन (विटामिन K) की कमी से हीमोफोलिया (रक्त का थक्का न जमना) रोग हो जाता है। 
  • यह यकृत (liver) में प्रोथॉम्बिन के संश्लेषण का कार्य करता है। 
  • डोइजी एवं डैम को संयुक्त रूप से चिकित्सा के क्षेत्र में विटामिन K की खोज करने के लिए वर्ष 1943 का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • शरीर में इस विटामिन के अभाव की स्थिति में चोट लगने पर रक्त का स्त्राव अनियंत्रित हो जाता है क्योंकि रक्त का थक्का बनने की क्रिया बाधित होती है।
  • विटामिन k जो कुछ भोज्य पदार्थों में उपस्थित रहता है और बैक्टीरिया द्वारा आंतो में भी बनता है, इसे प्रोथ्रोम्बिन बनाने के लिए यकृत में शोषित होना पड़ता है |
  • मानव रक्त का pH  – 7.4
  • रक्त में उपस्थित CO2 रुधिर के pH मान को कम करके ह्रदय की गति को बढ़ा देता है। 
  • अम्लीयता ह्रदय की गति को अधिक तथा क्षारीयता ह्रदय की गति को कम करता है।
  • ह्रदय गति को नियंत्रित करने में पोटैशियम की मुख्य भूमिका होती है।
  • विशेष- ज्ञात रक्त समूहों के अतिरिक्त दो नए तरह रक्त समूह भी विकसित हुए है INRA और Bombay जिसे HH रक्त समूह भी कहां जाता हैं जो कि 3 सितम्बर 2016 को सूरत के लोक सम्पन्न रक्तदान लैब में पता लगाया गया और आंकड़ों के मुताबिक़ केवल 7 लोग पूरी दुनिया में इस रक्त समूह के हैं।

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